हमारे बारे में

उद्देश्य

ईश्वर ने ब्राहमणों की उत्पत्ति का उद्देश्य ही धर्म रक्षणार्थ है माना है। ब्राहमण समाज ने इस दाइत्व का निर्वहन सदियों से बिना किसी बाधा के किया है। हम भी इसी उद्देश्य से समाज को मजबूत बनाने हेतु एक सूक्ष्म प्रयास कर रहे हैं ।
हमारा उद्देश्य है कि समाज की उन्नति के लिए कार्य करना। हम ब्राह्मण हैं हम स्वयं ही अपने समाज को उन्नत बना सकते हैं , फिर हम किसी और से सहयोग की अथवा दान की अपेक्षा क्यों रखें???? अपनी सुविधाओं के लिए हमे स्वयं ही आगे आना होगा.....हाँ संगठित होकर हम बड़े बोझ को कम जरूर कर सकते हैं इसलिए हमारा प्रयास है की हम सभी ब्राह्मण एक होकर किसी भी कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करें। धन्यवाद।

गौ हत्या का विरोध

जहाँ पर प्रदियों की हत्याएं होतीं है वजा पर विष-लोड बढ़ जाता है। दर्द तरंगें वहां के वातावरण को प्रभावित करतीं हैं। जिससे विनाशकारी प्राकृतिक घटनाएं घटतीं हैं। धरती माता अपने संतानों को मरते देखकर और निरंतर होते अत्याचार को न रोकने पर कृन्दन करती हैं,दहाड़ती है ,चीखती है ,वह अपने इस दुःख को भूकम्प ,सुनामी के रूप में प्रकट करती है। पशुधन गौ धन पर आज जो अत्याचार हो रहा है उसपर अंकुश नहीं लगाया गया तो क़त्ल -खाने बूचड़ खाने एक दिन देश की बर्बादी का कारण बनेंगे।yadi देश में सुख शांति चाहिए तो बे जुबान जीवों की हत्याओं को अविलम्ब बंद करने के लिए हमे प्रयास करना चाहिए।

प्रेरणा स्रोत

ब्राह्मण समजा की लिए कुछ भी कर पाना मेरे लिए अकल्पनीय है। ब्राह्मण समाज को जागृत करना मेरे लिए अकल्पनीय है। किन्तु समाज के लिए कुछ करने की कल्पना करना मेरे वश में हैं.....

ब्राह्मण शक्ति को एकत्रित करने के प्रयास में...ब्राह्मणों की सेवा करने के प्रयास में.... आपका और केवल आपका !!!!

Brahmin Sevak

मैं ब्राह्मण हूँ

धर्म युद्ध को सदैव तत्पर,कर्तव्य हेतु सदैव अग्रसर;परशुराम का हूँ मैं वंशज और उच्च कुल मैं रावण हूँमैं ब्राह्मण हूँ,सनातनो का मैं हूँ वाहक ,वेद-पुरानो का मैं पालक ;दत्तात्रेय सा मैं हूँ श्रेष्ठ ,दुस्तो का हूँ मैं संहारकनहीं प्रशंसा का मैं चाहक,द्रव्यों का ना मैं ग्राहकसमस्त जीवो में प्रभु राम का अति-प्रिय हूँ ;मैं ब्राह्मण हूँ,अविरल है अपनी ज्ञान की गंग,ब्रह्मा का मैं विशेष अंग;सतयुग से अब तक अभंग,कपट से अपने कर हैं तंग;जीवो के हम है आद ,शाश्त्रो के हम शंखनादगुण में श्रेष्ठ निर्विवाद ,औ जन हित का मैं तोरण हूँमैं ब्राह्मण हूँ,कर्मकांड का मैं परिचायक,मुक्तिमार्ग का मैं हू नायक;दिव्य भूमि का मैं अधिनायक,भक्ति भाव का मैं गायक;काँधे पर उपवीत रखे हूँ ,चोटी को निज शीश धरे हूँ ;सद्मार्ग पर ले जाने वाला जीवन का मैं आचरण हूँ!!मैं ब्राह्मण हूँ,.........

ब्राहमण और हिन्दू

हिंदू धर्म बहुत प्राचीन दिनों में सनातन धर्म (सनातन धर्म) के रूप में जाना जाता था। हिन्दू धर्म सत्य ,अहिंसा , दया और जीव प्रेम सिखारा है , हिन्दू धर्म सभी धर्मों का आधार है। हिन्दू धर्म के वेदों शाश्त्रों में आज की विज्ञानं से कहीं ज्यादा सरल और सुगम उपाय उपलब्ध हैं, हमें गर्व है की हमारा ब्राहमण समाज इसी हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण अंग है ,हिन्दू धर्म के विकास के साथ साथ ब्राहमण समाज ने भी विकास किया,ब्राहमण समाज ने भी इस विश्व को बहुत कुछ दिया , ब्राहमणों ने भी इस देश के लिए बलिदान दिया , पर हमने कभी अहंकार नहीं दिखया , सभ्यता ,शालीनता ,का एक अद्भुत संगम ब्राहमण समाज में देखने को मिलता है.

हे विप्र ! ब्रह्मवर्चस जगाओ भूमण्डल में प्रत्यर्वत्तन गान गाओ । हे विप्र ! ब्रह्मवर्चस जगाओ ॥ हुए विस्मृत अतीत के स्वर्णिम पृष्ठ । कर्म, धर्म से बन गए धृष्ट ॥ ...तुम ये दधीचि औश्र रामकृष्ण परमहंस । गुरु द्रोण, अष्टावक्र, वशिष्ठ के वंश ॥ भू्रभंगिमा से पुन: भूचाल लाओ । हे विप्र ! ब्रह्मवर्चस जगाओ ॥ विश्वगुरु तुम, पथ प्रदर्शक, ज्ञान के भण्डार । उपकार, सेवा, तप, क्षमा के आगार ॥ श्रुति, निगम, आगम, रामायण के गायक । धर्म, कर्म, मानवता के तुम प्रचारक ॥ संकल्प, स्वस्ति गान फिर गाओ । हे विप्र ! ब्रह्मवर्चस जगाओ ॥ गो, द्विज, धर्म, उपेक्षित आज । व्रत, तप, सत्कर्म, तिरोहित आज ॥ शक्ति दानवी हुई बड़ी प्रबल । कलिकाल, कपट, असत्य, छल ॥ भारत को जगतगुरु फिर बनाओ । हे विप्र ! ब्रह्मवर्चस जगाओ ॥